आज मैं अर्जुन पंडित अपनी आत्मकथा आपको सुनाने जा रहा हूँ जोकि एक एयरहोस्टेस की है और उसका नाम स्नेहा सिखावत था | मेरी मुलकात उससे दिल्ली से प्लेन में आते ही हुई थी और वो मेरे व्यक्तितत्व से इतनी प्रभावित हुई की उसने हवाई अड्डे पर पर अपने मोबाइल का नंबर भी मुझे दे दिया की हम आगे चलकर बात कर सकें | मैंने भी इतने अचे मौका का खूब फाइदा उठाया और अगले ही पल से उसे प्यार भरी बातें करके अपने जाल में फंसा लिया | मैं उसे कोई प्यार – व्यार नहीं करता था पर च्यूंकि मुझे इतने मस्त बदन और गोरी सूरत वाली पहली बार ही कोई लड़की मिली थी इसीलिए मैं उसे अपने हाथ से किसी भी हालत में जाने नहीं देना चाहता था |
उसके बाद से वो जब कभी भी अपनी छुट्टियाँ बिताने आती तो मैंने उसे अपने दोस्त के खाली बड़े बड़े से फार्म – हाउस में ले जाया करता जिससे उसके उप्पर मेरा भी व्यक्तितत्व भारी पड़ने लगा था और वो मुझसे शादी करने के लिए बेचैन हुई जा रही थी | मैं तो केवल उसके साथ सुहागरात ही बनाना चाहता था और एक दो बार की मुलाकात के बाद उसे मैं जी भर के लिए चूम लिया करता | एक रोज के बाद जब वो अपने लंबे काम से आई तो मैं भी उसकी चुत के दर्शन करने लिए बहुत ही तड़पा जा रहा था और इस बार मैंने पहली रात को चुदाई के आलम को पूरी तरह से तैयार कर चूका था | रात को मैंने उसे अपनी तरफ खींचा ओर उसके हाथ को सहलाते हुए उसे गर्म करने लगा |
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाते हुए उसके गाउन को खोल दिया और उसके पीछे से ब्रा को खोलते हुए चुचों को पीते हुए दबाने लगा | मैंने पहली बार ही इतने मोटे गोरों चुचों के दर्शन किये थे जिन्हें मैं मुंह में भरकर चुद रहा था | मैंने अब उसकी पैंटी को नीचे खींच दिया और उसकी चुत पर अपनी मस्तानी उंगलियां मसलने लगा | मैंने अब अपने भी कपड़े खोल डाले चुदाई होने की मुस्कान देती हुई आगे बढते हुए उसकी चुत में ऊँगली कुछ देर करता रहा जिससे कुछ देर बाद ही उसकी चिकनी गोरी चुत से पानी निकल पड़ा | मैं उसकी अंदर की गुलाबी वाली फांक से टपक रहे रस को चाटने अग अपनी जीभ से जिसपर वो सिसकियाँ ले रही थी और अपनी चुत के उप्परी हिस्से को मसल रही थी |
कुछ पल बाद ही मैंने स्नेहा की टांगों को खोलते हुए अपने लंड को उसकी चुत पर में देते हुए ज़ोरदार झटका मारा और मेरा लंड भी उसकी चुत में पूरा जाने ना चूका और वो अपनी गर्दन को झटकते हुए मस्त वाली जोर – जोर की सिसकियाँ लेने लगी | मैंने अब सब कुछ भुलाते हुए उसकी चुदम – चुदाई की और पीछे से उसके गोरों गद्देदार चूतडों को भी मसलता हुआ चला गया | मैंने उसके होठों अपने होठों तले दबा लेता जिसपर उसकी कामुक आवाजें और उत्तेजित कर रही थी और मैं उसके चूतडों के बीच ऊँगली उसकी गांड में देने लगा | इस तरह मैंने उसे दिखानेने के लिए अपनी मंगेतर बना लिया और कुछ महीने बाद उससे अपनी प्यास भुजाकर गायब हो चला |
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